उसकी पायल छम छम करती

Sanjana kumari Sanjana kumari PoemRecent2 min read
उसकी पायल छम-छम करती है,
भोर उजाला लेकर छम-छम करती है।

साँझ दीप उजाला कर मधुर राग सुनाती,
उसकी पायल वीणा के सुर गुनगुनाती।

घुँघरू संग मीत बसे, प्रीत संग रीत सजे हैं,
सावन की पुरवाई में अमराइयाँ झूले पड़े हैं।

पुष्पवाटिका मधुयामिनी में झूले प्यारे लगते,
मेघों के संदेशा संग बादल-बिजली जगते।

मधुर मिलन की छाया मधुबन में आई,
राग-रागिनियों में छन-छन धुन समाई।

इन्द्रधनुषी रंगों की छटा जब छाई है,
पानी की हर बूंद भी टप-टप गाई है।

घुँघरू की धुन में बसती मधुर सी आवाज़ है,
चूड़ियों की खनक में सजी हर एक साज़ है।

मोर-मयूर नाच रहे मधुबन के आँगन में,
प्यार की प्यास सजी हर धड़कन के संग में।

नित्य नृत्य रचती ये सपनों की रात है,
छुन-छुन करती गूँज उठे मधुयामिनी की बात है।



संजना ✍️

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