बूँद बूँद में उम्मीदें
बूँद बूँद में उम्मीदें
"बारिश" यह शब्द सुनते ही सुकून जैसा लगता है ना? लगता ही होगा। आखिर बारिश का मौसम इतना सुहाना जो होता है।
परन्तु किसानों के लिए बारिश सिर्फ एक सुहाना मौसम नहीं, उसकी साँस लेने का जरिया है।
यह बारिश भी न, अलग अलग तरीके से सबको सुकून देती है तो कभी सबको तड़पा देती है। कहते हैं न "अति हमेशा क्षति पहुँचा देती है", वही हाल है हमारे किसान का।
मेरे पिताजी भी एक किसान हैं। वो कहते हैं, "बारिश का कोई भरोसा नहीं।" फिर भी इसी भरोसे में रहते हैं कि बारिश होगी तो फसल अच्छी होगी।
लेकिन सच में बारिश कभी कभी भरोसा तोड़ देती है। कभी बारिश होकर फसल और खेत को हरियाली से भर देती है, तो कभी वही बारिश सारी फसल को अपने में बहा कर ले जाती है।
बारिश कभी अति हो जाती है और कभी क्षति भी देती है। फिर भी हम लोग बेसब्री से बारिश का इंतज़ार करते रहते हैं। कुछ तो बात होगी इस बारिश में।
शायद इसलिए। बारिश सिर्फ बूँद बूँद गिराने का जरिया नहीं है। वो उसी बूँद बूँद में कितनों की उम्मीद गिराता है। और हमारे किसान तो उसी उम्मीद पर जीते हैं। और किसानों की उसी उम्मीद की वजह से हम लोग जी रहे हैं।
संजना ✍️