बारिश और एहसास

Sanjana kumari Sanjana kumari PoemRecent1 min read
बारिश और एहसास

बारिश की पहली बूंद जब ज़मीन को छू जाती है,
दिल की कोई पुरानी याद फिर से जाग जाती है।

खिड़की पर बैठा मैं, चाय की चुस्कियाँ लेता हूँ,
हर गिरती बूंद में तेरा नाम ही पढ़ता हूँ।


भीगी सड़कों पर जैसे कहानी बिखरी हो,
हर मोड़ पर तेरी हँसी कहीं ठहरी हो।

कागज़ की कश्तियाँ फिर बचपन लौटा लाती हैं,
और ये हवाएँ तेरी खुशबू संग ले आती हैं।

बिजली की चमक में तेरी झलक दिख जाती है,
गरजते बादल में दिल की धड़कन सुनाई देती है

ये मॉनसून बस मौसम नहीं, एहसास है
हर बारिश की बूंद में छुपा एक खास राज़ है।


संजना ✍️

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