बारिश और एहसास
बारिश और एहसास
बारिश की पहली बूंद जब ज़मीन को छू जाती है,
दिल की कोई पुरानी याद फिर से जाग जाती है।
खिड़की पर बैठा मैं, चाय की चुस्कियाँ लेता हूँ,
हर गिरती बूंद में तेरा नाम ही पढ़ता हूँ।
भीगी सड़कों पर जैसे कहानी बिखरी हो,
हर मोड़ पर तेरी हँसी कहीं ठहरी हो।
कागज़ की कश्तियाँ फिर बचपन लौटा लाती हैं,
और ये हवाएँ तेरी खुशबू संग ले आती हैं।
बिजली की चमक में तेरी झलक दिख जाती है,
गरजते बादल में दिल की धड़कन सुनाई देती है
ये मॉनसून बस मौसम नहीं, एहसास है
हर बारिश की बूंद में छुपा एक खास राज़ है।
संजना ✍️