उसका इश्क़—बारिश से

Sanjana kumari Sanjana kumari StoryRecent2 min read
उसका इश्क़—बारिश से

जब बादल पहली बार घिरते हैं,
तो आसमान ही नहीं बदलता—
एक किसान का चेहरा भी
उम्मीद से भर उठता है।

सूखी मिट्टी पर गिरती पहली बूंद,
उसके लिए बस पानी नहीं होती…
वो एक लौटता हुआ वादा होती है,
जिसे वो हर साल फिर से मान लेता है।

वो झुककर उस मिट्टी को छूता है,
जैसे किसी अपने का हाथ थाम रहा हो,
और उस पल में—
बारिश, मिट्टी और वो…

तीनों एक कहानी बन जाते हैं।
वो बीज नहीं बोता,
अपना विश्वास दबा देता है ज़मीन के भीतर,
इस उम्मीद में कि

एक दिन ये विश्वास हरा होकर लौटेगा।
पर हर बार बारिश मेहरबान नहीं होती,
कभी वही इश्क़ परीक्षा बन जाता है…
फिर भी वो रूठता नहीं,

क्योंकि सच्चा प्रेम शिकायत नहीं करता।
और जब खेत लहलहाते हैं,
तो वो सिर्फ फसल नहीं होती—
वो उसके सब्र का जवाब होती है,

उसकी मोहब्बत की जीत होती है।
क्योंकि दुनिया समझे या ना समझे,
एक किसान जानता है—
उसका सबसे सच्चा इश्क़
बारिश से होता है।


संजना ✍️

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