मेरी माँ

Sanjana kumari Sanjana kumari PoemRecent2 min read
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मेरी माँ दुनिया में सबसे ख़ास,
उसके संग ही पूरा होता है मेरा हर अहसास।
चेहरे से वो जितनी सुंदर दिखती है,
दिल से उससे भी ज़्यादा कोमल, उतनी ही सच्ची लगती है।

वो स्नेह, त्याग और सच का अद्भुत संगम है,
जिसके बिना मेरी हर जीत भी अधूरी और हर खुशी बेरंग है।

दुनिया के सामने वो खुद को सख़्त बना लेती है,
पर मैं जानती हूँ—अंदर से वो मोम से भी ज़्यादा पिघल जाती है।
उसकी आँखों में मेरे लिए अनकही दुआएँ बसती हैं,
उसकी बाँहों में सारी थकानें पलभर में सिमट जाती हैं।

मैं कभी–कभी खुद को कम समझ लेती हूँ,
पर मेरी माँ की नज़र में मैं हमेशा सबसे सुंदर दिखती हूँ।
वो मेरे हर कदम पर चुपचाप अपना साया करती है,
मेरी छोटी-सी मुस्कान पर अपनी दुनिया वार देती है।

जो मुझे हर पल खास महसूस करवाती है,
वो मेरी माँ—जो मेरी हर तकलीफ़ खुद पर ले जाती है।

मेरी माँ—
मेरी ताकत, मेरी रोशनी, मेरी सबसे बड़ी पहचान,
उसके बिना अधूरी है मेरी ज़िंदगी, मेरा जहान।

संजना ✍️
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