कोई तो बताओ !
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कोई तो बताओ
मैं ज़्यादा बोलती हूँ, ऐसा बहुतों को लगता है।
किसी की अच्छाई का ज़्यादा गुणगान करती हूँ, ऐसा बहुतों को लगता है।
मैं बहुत उलझन में हूँ, कोई तो बताओ।
कहते हैं, मैं दूसरों की अच्छाई से तुरंत प्रभावित हो जाती हूँ। ये ग़लत है या सही, कोई तो बताओ।
अकसर सब कहते हैं, मुझसे — “तुममें जो अच्छाई है बस उसे देखो।”
क्या दूसरों की अच्छाई से भी प्रेरित होना ग़लत है क्या? कोई तो बताओ।
मैंने हँस के धन्यवाद किया उसका, पर मैं चिंतित हूँ।
दूसरों की भी अच्छाई देखना ग़लत है क्या? कोई तो बताओ?
मैंने सुना है, “दूसरों की अच्छाई देखकर तारीफ़ कर दिया करो, नहीं तो ईश्वर तुमसे तुम्हारी अच्छाईयाँ छीन लेता है।”
क्या ये सही है? कोई तो बताओ। क्या तारीफ़ करना ग़लत है? कोई तो बताओ।
संजना✍️
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