खामोशियों में तुम
✦ ✦ ✦
खामोशियों में तुम
कुछ लोग चले जाते हैं,
पर पूरी तरह कभी जाते नहीं
वे आदतों में नहीं,
खामोशियों में रह जाते हैं।
कभी यूँ ही, बिना किसी कारण,
तुम याद आते हो—
ना कोई बेचैनी होती है,
ना कोई अधूरापन…
बस एक ठहरा हुआ एहसास।
तुम्हारा नाम अब
दिल की धड़कन नहीं बढ़ाता,
पर एक हल्की-सी मुस्कान
ज़रूर छोड़ जाता है।
मैंने अब तुम्हें पाने की कोशिश नहीं की,
और शायद यही ठीक था..
क्योंकि हर रिश्ता
मंज़िल के लिए नहीं होता।
कुछ रिश्ते बस
ज़िंदगी को थोड़ा गहरा बना जाते हैं।
और तुम…
उन्हीं में से एक हो
जिन्हें मैंने खोया नहीं,
बस समझ लिया है।
संजना ✍️
✦ ✦ ✦